प्रेम की घाटी में विलीन होना आवश्यक,
इस मोहभंग को सत्य से परिचित कराना अनिवार्य।
जो अनुराग की सभा में पलकें न झपकाए,
ऐसे मर्मज्ञ से दूरी बनाए रखना उचित।
कुंतलों की कालिमा दिखाऊँ या उज्ज्वल मुख,
इतना तो मृत्यु को भी जानना अपरिहार्य।
यदि कोई मदमत्त मिले, करूँ उससे यही प्रश्न,
निर्जन परदेश में आख़िर, कितनी ऊँची वाणी आवश्यक?
आकांक्षाएँ तो हैं, पर संकल्प नहीं किसी साध्य का,
अर्थात अब समय आ गया, प्रायश्चित्त का अपरिहार्य।
क्यों बारंबार मरुस्थल की सैर कराते हो मुझे?
अब किसी नीरव नगरी का कोना ही आवश्यक।